चंद्रबदनी परिसर में आयोजित हुई भारतीय ज्ञान परम्परा पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठीचन्द्रबदनी।आज दिनांक 24/08/2026 को श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, परिसर चन्द्रबदनी (नैखरी) में परिसर निदेशक डॉ महंथ मौर्य की अध्यक्षता में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत “भारतीय ज्ञान परंपरा (भारतीय भाषाओं के परिप्रेक्ष्य में)” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन पर विमर्श करना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात् कार्यक्रम संयोजक डॉ. मूलचन्द्र शुक्ल (असिस्टेंट प्रोफेसर,संस्कृत विभाग) द्वारा संगोष्ठी की रूपरेखा एवं विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया। परिसर के प्राचार्य द्वारा अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व तथा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में इसकी उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए गए।कार्यक्रम के सचिव डॉ. दयाधर दीक्षित (असिस्टेंट प्रोफेसर, रसायन विज्ञान विभाग) ने संगोष्ठी के आयोजन की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर शिवशंकर मिश्र, कुलपति, पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.) ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय भाषाएं केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और जीवन-दृष्टि की संवाहक हैं।मुख्य वक्ता प्रोफेसर रामबहादुर शुक्ल, विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर विस्तार से विचार रखते हुए भारतीय भाषाओं में निहित ज्ञान-संपदा के संरक्षण, अध्ययन एवं नई पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और समकालीन समाज से जोड़ने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।कार्यक्रम सह-सचिव सुश्री वन्दना( असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग) ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भारतीय भाषाओं के संरक्षण को वर्तमान पीढ़ी के लिए आवश्यक बताते हुए इनके व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया।संगोष्ठी में विश्वविद्यालय एवं परिसर के शिक्षकगण, शोधार्थी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे और शोध-पत्र प्रस्तुतियों एवं विषयगत विमर्श में सक्रिय सहभागिता की गई। तकनीकी सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने भारतीय भाषाओं में निहित ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, संस्कृति, लोक परंपराओं, शिक्षा पद्धतियों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के समकालीन संदर्भ जैसे विविध पक्षों पर अपने शोधपरक शोधपत्र .प्रस्तुत किए।कार्यक्रम के अंत में डॉ. गुरु प्रसाद थपलियाल( असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल विभाग) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शोध-पत्र वाचकों, आयोजकों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।संगोष्ठी का आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भारतीय भाषाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इसे समकालीन शैक्षिक संदर्भों से जोड़ने की दिशा में महत्त्वपूर्ण पहल रहा।



